महीने का हिसाब देखना ज़्यादातर दुकानों में या तो होता ही नहीं, या इतना बड़ा काम मान लिया जाता है कि हमेशा अगले हफ़्ते पर टलता रहता है। दोनों का नतीजा एक ही है — दुकान चलती रहती है और यह किसी को ठीक-ठीक पता नहीं होता कि किस दिशा में।
इसका हल पूरा लेखा-जोखा नहीं है। पाँच नंबर काफ़ी हैं, और उन्हें निकालने में आधा घंटा लगता है — बशर्ते महीने भर लेन-देन दर्ज होते रहे हों।
पाँच नंबर
| नंबर | क्या बताता है | किस पर ध्यान |
|---|---|---|
| महीने की बिक्री | कारोबार कितना हुआ | पिछले महीने और पिछले साल के इसी महीने से तुलना |
| कुल बकाया उधार | कितना पैसा बाहर है | बिक्री के मुक़ाबले बढ़ रहा है या नहीं |
| ९० दिन से पुराना बकाया | कितना फँस चुका है | यह हर महीने घटना चाहिए |
| सप्लायर को देना | कितना पैसा देना है | अगले महीने के इंतज़ाम के लिए |
| गल्ले का कुल फ़र्क़ | रोज़ के मिलान का जोड़ | एक ही तरफ़ झुका है या दोनों तरफ़ |
इन पाँचों में सबसे कम देखा जाने वाला तीसरा है, और अक्सर वही सबसे ज़्यादा बताता है। कुल बकाया बढ़ना बुरी बात नहीं — बढ़ते कारोबार में वह बढ़ता ही है। पर नब्बे दिन से पुराना हिस्सा बढ़ना हमेशा बुरी ख़बर है, चाहे कुल कुछ भी हो।
अकेला नंबर धोखा देता है
इन नंबरों की ताक़त अकेले में नहीं, जोड़ी में है। कुछ जोड़ियाँ ऐसी हैं जो हर दुकान पर लागू होती हैं।
- बिक्री बढ़ी और बकाया उससे तेज़ बढ़ा — यानी बढ़त उधार पर हुई है, नक़द पर नहीं। यह पहले महीने अच्छा लगता है और चौथे महीने भारी पड़ता है।
- बिक्री वही रही पर पुराना बकाया बढ़ा — यानी वसूली रुक गई है, बिक्री नहीं। ध्यान वसूली पर चाहिए।
- बिक्री बढ़ी और सप्लायर का बकाया उससे ज़्यादा बढ़ा — यानी माल ज़्यादा आया और बिका उतना नहीं। स्टॉक में पैसा फँस रहा है।
- गल्ले का फ़र्क़ हर महीने एक ही तरफ़ — यानी कहीं कोई ख़र्च या वसूली नियम से दर्ज नहीं हो रही। यह चोरी से कहीं ज़्यादा बार लिखने की चूक निकलता है।
जहाँ ये नंबर मिलते हैं
खाता ऐप में बिक्री, ग्राहकों का बकाया, सप्लायर का हिसाब और दिन के बंद होने की रिपोर्टें तारीख़ की सीमा चुनकर देखी जा सकती हैं, इसलिए ये पाँचों नंबर अलग से जोड़ने नहीं पड़ते।
पर एक बात दोहराने लायक़ है: कोई रिपोर्ट वह नहीं दिखा सकती जो दर्ज ही नहीं हुआ। महीने के आख़िर का यह आधा घंटा उतना ही काम का होगा जितना महीने भर रोज़ का दस मिनट रहा हो।
एक महीने का नंबर एक नंबर है। छह महीने के नंबर एक दिशा हैं।
इसे टालिए मत
यह वह काम है जिसे टालने पर कोई तुरंत नुक़सान नहीं दिखता — और यही वजह है कि यह सबसे ज़्यादा टलता है। जिस महीने यह छूटता है, उस महीने कुछ नहीं बिगड़ता। छठे महीने जब कोई फ़ैसला लेना हो, तब पता चलता है कि तुलना करने के लिए कुछ है ही नहीं।
महीने की एक तारीख़ तय कर लीजिए — जैसे हर महीने की पहली — और उस दिन आधा घंटा इसके लिए रखिए। तीन महीने बाद वह पन्ना आपको अपनी दुकान के बारे में वह बताने लगेगा जो आज कोई नहीं बता सकता।