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स्टॉक और पैसा

कौन सा सामान असल में मुनाफ़ा देता है

सबसे ज़्यादा बिकने वाला सामान अक्सर सबसे कम बचाता है। दुकान का असली मुनाफ़ा उन चीज़ों से आता है जिन पर कोई ध्यान नहीं देता।

7 मिनट का पाठ

कौन सा सामान असल में मुनाफ़ा देता हैपट्टियाँ बताती हैं कि कौन सा सामान कितना बिकता है और बिंदु बताते हैं कि हर बिक्री पर कितना बचता है। सबसे ज़्यादा बिकने वाला सामान सबसे कम बचाता है।जो सबसे ज़्यादा बिकता है, वही सबसे ज़्यादा नहीं बचातातेलचीनीमसालेसाबुनकम बिका, ज़्यादा बचापट्टी — कितना बिकाबिंदु — कितना बचा

संक्षेप में

  • कितना बिका और कितना बचा — ये दो अलग सवाल हैं, और दुकान अक्सर सिर्फ़ पहला देखती है।
  • जो सामान सबसे ज़्यादा बिकता है उस पर आम तौर पर सबसे पतला मुनाफ़ा होता है, क्योंकि उसी का दाम सबको मालूम होता है।
  • मुनाफ़ा जानने के लिए ख़रीद का दाम दर्ज होना ज़रूरी है। बिना लागत के मुनाफ़ा नहीं निकल सकता।
  • फ़ैसला बिक्री और मुनाफ़े को साथ देखकर कीजिए — अकेला कोई नंबर ग़लत रास्ते पर ले जाता है।

अगर किसी दुकानदार से पूछा जाए कि उसकी दुकान में सबसे ज़्यादा क्या बिकता है, तो जवाब तुरंत आता है। और अगर पूछा जाए कि सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा किस पर होता है, तो जवाब आने में देर लगती है — और अक्सर वह अंदाज़ा होता है।

यह अंतर मायने रखता है, क्योंकि दुकान के ज़्यादातर फ़ैसले — कितना माल मँगाएँ, कहाँ जगह दें, किस पर छूट दें — बिक्री देखकर लिए जाते हैं, जबकि दुकान चलती मुनाफ़े से है।

ऊँची पट्टी और नीचा बिंदु — यही वह जोड़ी है जो सबसे ज़्यादा धोखा देती है।पट्टियाँ बताती हैं कि कौन सा सामान कितना बिकता है और बिंदु बताते हैं कि हर बिक्री पर कितना बचता है; सबसे ज़्यादा बिकने वाले पर सबसे कम बचता है।जो सबसे ज़्यादा बिकता है, वही सबसे ज़्यादा नहीं बचातातेलचीनीमसालेसाबुनकम बिका, ज़्यादा बचापट्टी — कितना बिकाबिंदु — कितना बचा
ऊँची पट्टी और नीचा बिंदु — यही वह जोड़ी है जो सबसे ज़्यादा धोखा देती है।

दो सवाल, जो एक नहीं हैं

पहला सवाल है: क्या ज़्यादा बिकता है। दूसरा है: किस पर ज़्यादा बचता है। ये दोनों अक्सर एक ही चीज़ की तरफ़ इशारा नहीं करते, और इसकी वजह सीधी है।

जो चीज़ रोज़ बिकती है, उसका दाम हर ग्राहक को मालूम होता है — तेल, चीनी, दूध, आटा। ऐसी चीज़ों पर मुनाफ़ा पतला रखना पड़ता है, वरना ग्राहक बग़ल की दुकान से ले लेता है। और जो चीज़ें महीने में गिनी-चुनी बार बिकती हैं, उन पर दाम की तुलना कोई नहीं करता — वहीं असली मुनाफ़ा बैठा होता है।

सामानमहीने की बिक्रीमुनाफ़ा प्रति बिक्रीमहीने का मुनाफ़ा
चीनी₹४२,०००पतलाकम
तेल₹३८,०००पतलाकम
मसाले₹९,०००मोटाइन तीनों से ज़्यादा
साबुन और सफ़ाई₹१४,०००मध्यमठीक-ठाक

यह तालिका किसी असली दुकान की नहीं है, पर इसका आकार लगभग हर किराना दुकान में मिलता है। बिक्री की सूची में मसाले तीसरे नंबर पर हैं; मुनाफ़े की सूची में अक्सर पहले।

पहले ख़रीद का दाम दर्ज कीजिए

यह पूरे मामले की बुनियाद है और इसे छोड़कर आगे नहीं बढ़ा जा सकता। मुनाफ़ा दो दामों का फ़र्क़ है, इसलिए जब तक ख़रीद का दाम दर्ज नहीं है, कोई रिपोर्ट मुनाफ़ा नहीं बता सकती — चाहे वह कितनी भी अच्छी हो।

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    अपनी बीस सबसे ज़्यादा बिकने वाली चीज़ें लीजिए

    इन्हीं से आधी बिक्री बनती है। पूरे स्टॉक से शुरू करने की कोशिश ही वह वजह है जिससे यह काम कभी पूरा नहीं होता।

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    हर एक का ख़रीद दाम दर्ज कीजिए

    आख़िरी बिल से लीजिए, याद से नहीं। दाम बदलते रहते हैं और याद पुरानी होती है।

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    माल आने पर दाम अपडेट कीजिए

    यही वह आदत है जो इस पूरे हिसाब को ज़िंदा रखती है। नया माल आया और दाम बदला — उसी वक़्त बदल दीजिए।

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    महीने के आख़िर में रिपोर्ट देखिए

    बिक्री और मुनाफ़ा साथ-साथ देखिए, अलग-अलग नहीं। असली जानकारी दोनों के मेल में है।

फ़ैसले जो इस जानकारी से बदलते हैं

  • जगह — जो सामान मोटा मुनाफ़ा देता है, वह आँख के सामने वाली शेल्फ़ पर होना चाहिए, न कि पीछे।
  • छूट — पतले मुनाफ़े वाले सामान पर छूट सबसे महँगी पड़ती है। छूट वहाँ दीजिए जहाँ गुंजाइश है।
  • ऑर्डर — तेज़ बिकने वाला सामान भरा रहना चाहिए, पर पैसा उसी में मत फँसाइए। मोटा मुनाफ़ा देने वाले सामान का ख़ाली रहना ज़्यादा महँगा है।
  • नया सामान — नया माल रखने का फ़ैसला उस श्रेणी में कीजिए जहाँ मुनाफ़ा पहले से अच्छा है, वहाँ नहीं जहाँ बिक्री ज़्यादा है।
बिक्री बताती है कि लोग क्या चाहते हैं। मुनाफ़ा बताता है कि दुकान किससे चलती है। फ़ैसला दोनों को साथ देखकर होता है।

एक चेतावनी

इस जानकारी का एक ग़लत इस्तेमाल भी है — पतले मुनाफ़े वाला सामान हटा देना। यह लगभग हमेशा नुक़सान करता है, क्योंकि वही सामान ग्राहक को दुकान तक लाता है। चीनी लेने आया ग्राहक साथ में चार और चीज़ें ले जाता है, और असली मुनाफ़ा उन्हीं चार में होता है।

इसलिए सवाल यह नहीं है कि क्या हटाया जाए। सवाल यह है कि जो सामान दुकान चला रहा है, उसे और अच्छी जगह, ज़्यादा ध्यान और सही स्टॉक कैसे मिले।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

यह कैसे पता करूँ कि किस सामान पर कितना बचता है?

इसके लिए दो नंबर चाहिए — वह दाम जिस पर आपने ख़रीदा और वह दाम जिस पर बेचा। जब हर सामान के साथ उसका ख़रीद दाम दर्ज होता है, तो हर बिक्री पर बचा हुआ हिस्सा अपने आप निकल आता है। खाता ऐप में सामान की बिक्री और मुनाफ़े की रिपोर्ट इसी से बनती है — पर वह उतनी ही सही होगी जितना सही ख़रीद दाम दर्ज किया गया हो।

क्या कम बिकने वाला सामान हटा देना चाहिए?

सिर्फ़ कम बिकने की वजह से नहीं। कुछ चीज़ें कम बिकती हैं पर मोटा मुनाफ़ा देती हैं, और कुछ इसलिए रखी जाती हैं कि ग्राहक उन्हीं के लिए आता है और साथ में बाक़ी सामान भी ले जाता है। जो सामान न ठीक से बिकता है, न कुछ बचाता है, और न किसी और सामान को खींचता है — हटाने का फ़ैसला उसी का बनता है।

मुनाफ़ा प्रतिशत में देखूँ या रुपये में?

दोनों में, और यही ज़्यादातर ग़लती की जड़ है। तीस प्रतिशत मुनाफ़ा सुनने में बड़ा लगता है, पर बीस रुपये के सामान पर वह छह रुपये है। बड़ी रकम वाले सामान पर दस प्रतिशत भी उससे ज़्यादा हो सकता है। महीने के आख़िर में जो मायने रखता है वह कुल रुपये हैं, प्रतिशत नहीं।

अगर मैं ख़रीद का दाम दर्ज नहीं करता तो?

तो मुनाफ़े का कोई भी हिसाब अंदाज़ा ही रहेगा। यह पहला क़दम है और इसे टालने का कोई तरीक़ा नहीं है। शुरुआत उन बीस-तीस चीज़ों से कीजिए जो आपकी आधी बिक्री बनाती हैं — उनके ख़रीद दाम दर्ज कर दीजिए, बाक़ी बाद में। आधी बिक्री का सही मुनाफ़ा पूरे स्टॉक के अंदाज़े से कहीं ज़्यादा काम का है।

खाता ऐप मुफ़्त है

बिलिंग, उधार खाता, स्टॉक और रिपोर्ट — सब आपके फ़ोन पर। कोई कार्ड नहीं, कुछ रद्द करने की ज़रूरत नहीं।

देखें आपको क्या मिलता है

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