मोबाइल से हिसाब रखने के ख़िलाफ़ सबसे आम आपत्ति यही होती है: "नेट चला गया तो?" यह जायज़ आपत्ति है। बहुत सी जगहों पर लाइन दिन में कई बार जाती है, और त्योहार के दिनों में — जब भीड़ सबसे ज़्यादा होती है — सबसे ज़्यादा जाती है।
जवाब यह है कि बिलिंग को इंटरनेट की ज़रूरत उस वक़्त नहीं होती जब बिल बन रहा हो। बिल फ़ोन में बनता है और फ़ोन में ही रुक जाता है; इंटरनेट सिर्फ़ उसे भेजने के लिए चाहिए, और वह बाद में हो सकता है।
लाइन जाने पर क्या करें
- 1
वैसे ही बिल बनाते रहिए
कुछ बदलने की ज़रूरत नहीं। सामान जोड़िए, कुल बनाइए, ग्राहक को दिखाइए। बिल बन गया है।
- 2
उधार भी वैसे ही दर्ज कीजिए
ग्राहक का बकाया फ़ोन में उसी तरह चढ़ेगा। ध्यान रहे कि उस वक़्त बकाया वही दिखेगा जो आख़िरी बार चढ़ा था — अगर उसी दिन किसी और फ़ोन से भुगतान लिया गया हो तो वह यहाँ नहीं दिखेगा।
- 3
दोबारा मत बनाइए
यह सबसे ज़रूरी बात है। रुका हुआ बिल बना हुआ बिल है। दोबारा बनाने पर लाइन आते ही दोनों चढ़ेंगे और दिन की बिक्री ग़लत हो जाएगी।
- 4
लाइन आने पर एक नज़र डालिए
रुके हुए बिल चढ़ जाने चाहिए। अगर कोई रुका दिखे तो फ़ोन का इंटरनेट एक बार बंद-चालू कीजिए।
किस चीज़ पर ध्यान रखना है
ऑफ़लाइन रहते हुए फ़ोन के पास वही जानकारी होती है जो आख़िरी बार चढ़ी थी। ज़्यादातर कामों में इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता, पर कुछ जगहों पर पड़ता है।
| काम | ऑफ़लाइन में | ध्यान |
|---|---|---|
| नया बिल बनाना | पूरी तरह चलता है | कुछ नहीं |
| उधार दर्ज करना | चलता है | बकाया आख़िरी चढ़े हुए हिसाब का दिखेगा |
| स्टॉक देखना | चलता है | दूसरे फ़ोन की बिक्री शामिल नहीं होगी |
| रिपोर्ट देखना | अधूरी रहेगी | लाइन आने के बाद देखिए |
| दो फ़ोन से एक ही ग्राहक | जोखिम है | उस दौरान एक ही फ़ोन तय कीजिए |
आख़िरी पंक्ति ही असली सावधानी है। एक दुकान पर दो फ़ोन चल रहे हों और लाइन चली जाए, तो दोनों को एक-दूसरे का पता नहीं रहता। ऐसे में यह तय कर लेना कि उस दौरान बिल कौन बनाएगा, बाद की सारी उलझन बचा देता है।
लंबी बंदी में
अगर लाइन कई घंटे या पूरे दिन नहीं है, तो भी तरीक़ा वही रहता है — बिल बनते रहिए। बस दिन के आख़िर में जब लाइन आए, तो एक बार दिन का कुल देख लीजिए और अपने गल्ले से मिला लीजिए। अगर दोनों मिल गए, तो सब कुछ चढ़ चुका है।
इंटरनेट बिल बनाने के लिए नहीं चाहिए। वह सिर्फ़ बिल को वहाँ पहुँचाने के लिए चाहिए जहाँ वह सुरक्षित रहेगा।
फ़ोन बदलने से पहले
एक बात जो अक्सर छूट जाती है: अगर फ़ोन में कुछ बिल रुके हों और उसी वक़्त फ़ोन बदल दिया जाए या ऐप हटा दिया जाए, तो वे बिल चले जाएँगे। फ़ोन बदलने से पहले एक बार लाइन आने दीजिए और देख लीजिए कि कुछ रुका हुआ नहीं है।
यही बात दुकान बंद करके छुट्टी पर जाने से पहले भी लागू होती है। जो चढ़ चुका है वह सुरक्षित है; जो फ़ोन में रुका है वह सिर्फ़ उसी फ़ोन में है।