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शुरुआत

इंटरनेट न हो तो बिलिंग कैसे चले

लाइन जाना दुकान रुकने की वजह नहीं होनी चाहिए। बिल बनते रहते हैं, फ़ोन में रुके रहते हैं, और लाइन आते ही अपने आप चढ़ जाते हैं।

6 मिनट का पाठ

इंटरनेट न हो तब भी बिलइंटरनेट बंद रहते हुए भी तीन बिल बनते हैं और फ़ोन में रुके रहते हैं; लाइन आते ही तीनों अपने आप चढ़ जाते हैं।लाइन गई, दुकान नहीं रुकीइंटरनेट नहींफ़ोन में रुके हुए बिलचढ़ गए

संक्षेप में

  • इंटरनेट बंद रहने पर भी बिल बनते रहते हैं। वे फ़ोन में रुकते हैं और लाइन आने पर अपने आप चढ़ जाते हैं।
  • जो बिल रुके हुए हैं वे बने हुए बिल हैं — दोबारा बनाने की ज़रूरत नहीं, और यही सबसे बड़ी ग़लती होती है।
  • लाइन आने के बाद एक बार देख लीजिए कि सब चढ़ गया। यह दस सेकंड का काम है।
  • एक ही बिल दो फ़ोन से मत बनाइए। जिस फ़ोन पर बना है, उसी से चढ़ने दीजिए।

मोबाइल से हिसाब रखने के ख़िलाफ़ सबसे आम आपत्ति यही होती है: "नेट चला गया तो?" यह जायज़ आपत्ति है। बहुत सी जगहों पर लाइन दिन में कई बार जाती है, और त्योहार के दिनों में — जब भीड़ सबसे ज़्यादा होती है — सबसे ज़्यादा जाती है।

जवाब यह है कि बिलिंग को इंटरनेट की ज़रूरत उस वक़्त नहीं होती जब बिल बन रहा हो। बिल फ़ोन में बनता है और फ़ोन में ही रुक जाता है; इंटरनेट सिर्फ़ उसे भेजने के लिए चाहिए, और वह बाद में हो सकता है।

बिल बनते रहते हैं। सिर्फ़ चढ़ना रुकता है।इंटरनेट बंद रहते हुए तीन बिल बनते हैं और फ़ोन में रुके रहते हैं; लाइन आते ही तीनों चढ़ जाते हैं।लाइन गई, दुकान नहीं रुकीइंटरनेट नहींफ़ोन में रुके हुए बिलचढ़ गए
बिल बनते रहते हैं। सिर्फ़ चढ़ना रुकता है।

लाइन जाने पर क्या करें

  1. 1

    वैसे ही बिल बनाते रहिए

    कुछ बदलने की ज़रूरत नहीं। सामान जोड़िए, कुल बनाइए, ग्राहक को दिखाइए। बिल बन गया है।

  2. 2

    उधार भी वैसे ही दर्ज कीजिए

    ग्राहक का बकाया फ़ोन में उसी तरह चढ़ेगा। ध्यान रहे कि उस वक़्त बकाया वही दिखेगा जो आख़िरी बार चढ़ा था — अगर उसी दिन किसी और फ़ोन से भुगतान लिया गया हो तो वह यहाँ नहीं दिखेगा।

  3. 3

    दोबारा मत बनाइए

    यह सबसे ज़रूरी बात है। रुका हुआ बिल बना हुआ बिल है। दोबारा बनाने पर लाइन आते ही दोनों चढ़ेंगे और दिन की बिक्री ग़लत हो जाएगी।

  4. 4

    लाइन आने पर एक नज़र डालिए

    रुके हुए बिल चढ़ जाने चाहिए। अगर कोई रुका दिखे तो फ़ोन का इंटरनेट एक बार बंद-चालू कीजिए।

किस चीज़ पर ध्यान रखना है

ऑफ़लाइन रहते हुए फ़ोन के पास वही जानकारी होती है जो आख़िरी बार चढ़ी थी। ज़्यादातर कामों में इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता, पर कुछ जगहों पर पड़ता है।

कामऑफ़लाइन मेंध्यान
नया बिल बनानापूरी तरह चलता हैकुछ नहीं
उधार दर्ज करनाचलता हैबकाया आख़िरी चढ़े हुए हिसाब का दिखेगा
स्टॉक देखनाचलता हैदूसरे फ़ोन की बिक्री शामिल नहीं होगी
रिपोर्ट देखनाअधूरी रहेगीलाइन आने के बाद देखिए
दो फ़ोन से एक ही ग्राहकजोखिम हैउस दौरान एक ही फ़ोन तय कीजिए

आख़िरी पंक्ति ही असली सावधानी है। एक दुकान पर दो फ़ोन चल रहे हों और लाइन चली जाए, तो दोनों को एक-दूसरे का पता नहीं रहता। ऐसे में यह तय कर लेना कि उस दौरान बिल कौन बनाएगा, बाद की सारी उलझन बचा देता है।

लंबी बंदी में

अगर लाइन कई घंटे या पूरे दिन नहीं है, तो भी तरीक़ा वही रहता है — बिल बनते रहिए। बस दिन के आख़िर में जब लाइन आए, तो एक बार दिन का कुल देख लीजिए और अपने गल्ले से मिला लीजिए। अगर दोनों मिल गए, तो सब कुछ चढ़ चुका है।

इंटरनेट बिल बनाने के लिए नहीं चाहिए। वह सिर्फ़ बिल को वहाँ पहुँचाने के लिए चाहिए जहाँ वह सुरक्षित रहेगा।

फ़ोन बदलने से पहले

एक बात जो अक्सर छूट जाती है: अगर फ़ोन में कुछ बिल रुके हों और उसी वक़्त फ़ोन बदल दिया जाए या ऐप हटा दिया जाए, तो वे बिल चले जाएँगे। फ़ोन बदलने से पहले एक बार लाइन आने दीजिए और देख लीजिए कि कुछ रुका हुआ नहीं है।

यही बात दुकान बंद करके छुट्टी पर जाने से पहले भी लागू होती है। जो चढ़ चुका है वह सुरक्षित है; जो फ़ोन में रुका है वह सिर्फ़ उसी फ़ोन में है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

इंटरनेट न हो तो क्या ऐप चलेगा?

हाँ। खाता ऐप में बिल इंटरनेट के बिना भी बनते हैं और फ़ोन में सुरक्षित रुके रहते हैं। जैसे ही लाइन वापस आती है, वे अपने आप चढ़ जाते हैं — इसके लिए कुछ अलग करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। ग्राहक को बिल उसी वक़्त दिखाया या दिया जा सकता है।

रुके हुए बिल कहीं खो तो नहीं जाएँगे?

वे फ़ोन में सुरक्षित रहते हैं, इसलिए लाइन आने तक इंतज़ार करना सही तरीक़ा है। जो सबसे बड़ी ग़लती होती है वह यह है कि लोग उन्हें दोबारा बना देते हैं — और फिर लाइन आने पर दोनों चढ़ जाते हैं, जिससे बिक्री दोगुनी दिखती है और स्टॉक ग़लत हो जाता है। रुका हुआ बिल भी बना हुआ बिल है।

दो कर्मचारी अलग-अलग फ़ोन से बिल बना रहे हों तो?

यह ठीक है — दोनों के बिल अपने-अपने फ़ोन में रुकेंगे और लाइन आने पर दोनों चढ़ जाएँगे। ध्यान बस इतना रखना है कि एक ही बिक्री का बिल दोनों फ़ोन से न बने। ऑफ़लाइन रहते हुए एक फ़ोन को यह नहीं पता होता कि दूसरे ने क्या किया, इसलिए यह तय कर लीजिए कि उस दौरान कौन बिल बनाएगा।

लाइन आने के बाद क्या देखना चाहिए?

बस यह कि रुके हुए बिल चढ़ गए हैं या नहीं, और दिन का कुल वही दिख रहा है जो होना चाहिए। यह दस सेकंड का काम है और दिन बंद करने के मिलान में अपने आप हो जाता है — अगर उस दिन गल्ला और हिसाब मिल गए, तो सब कुछ चढ़ चुका है।

खाता ऐप मुफ़्त है

बिलिंग, उधार खाता, स्टॉक और रिपोर्ट — सब आपके फ़ोन पर। कोई कार्ड नहीं, कुछ रद्द करने की ज़रूरत नहीं।

देखें आपको क्या मिलता है

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