बही से फ़ोन पर आने में जो चीज़ रोकती है, वह ऐप नहीं होती। वह यह ख़याल होता है कि पहले सालों का हिसाब चढ़ाना पड़ेगा — हज़ारों लाइनें, हर ग्राहक का हर लेन-देन। यह ख़याल पूरे काम को इतना बड़ा बना देता है कि शुरुआत ही नहीं होती।
अच्छी ख़बर यह है कि यह ज़रूरी ही नहीं है। हिसाब का काम आज से आगे का है। जो चीज़ आज चाहिए वह सिर्फ़ एक है — हर ग्राहक पर आज कितना बनता है।
चार शामों का काम
- 1
बकाया वाले ग्राहकों की सूची बनाइए
बही में से सिर्फ़ वे नाम निकालिए जिन पर कुछ बाक़ी है। जिनका हिसाब चुकता है वे इस काम में नहीं आते — उन्हें बाद में, जब वे अगली बार आएँ।
- 2
हर नाम के सामने आज का बकाया लिखिए
एक रकम, एक तारीख़। पुराने लेन-देन नहीं। अगर किसी का हिसाब उलझा हुआ है तो उसे अलग रख दीजिए और आख़िर में देखिए।
- 3
रोज़ पंद्रह मिनट, बीस-पच्चीस नाम
फ़ोन में ग्राहक जोड़िए, नंबर डालिए, और शुरुआती बकाया दर्ज कीजिए। एक शाम में सब कुछ करने की कोशिश मत कीजिए।
- 4
जो आज सामने आए, उसे आज जोड़िए
जिस ग्राहक का हिसाब उलझा हुआ है, उसका सही आँकड़ा उससे बात करके ही निकलेगा। वह अगली बार दुकान पर आए, तभी जोड़िए।
जिनका हिसाब उलझा है
हर बही में कुछ नाम ऐसे होते हैं जिनका हिसाब साफ़ नहीं है — कहीं तारीख़ नहीं, कहीं रकम पर निशान लगा है, कहीं आधा भुगतान लिखा है और आधा याद में। इन्हें अलग रख दीजिए और बाक़ी काम रोकिए मत।
इन नामों का हिसाब ग्राहक के साथ बैठकर ही निकलेगा, और यह अच्छा भी है। जो रकम दोनों की सहमति से तय होती है, वह उस रकम से कहीं ज़्यादा मज़बूत होती है जो अकेले बही से निकाली गई हो।
पहला दिन कैसा दिखेगा
पहले दिन आपके फ़ोन में हर ग्राहक का बस एक नंबर होगा — आज का बकाया। कोई इतिहास नहीं, कोई पुरानी तारीख़ नहीं। यह अधूरा लगता है, पर यही सही शुरुआत है।
दूसरे दिन से हर नया लेन-देन उसी के ऊपर जुड़ता जाएगा — तारीख़ के साथ, नाम के साथ। दो महीने बाद आपके पास हर ग्राहक का साफ़ रिकॉर्ड होगा, और वह रिकॉर्ड उस दिन से शुरू होगा जिस दिन आपने यह काम किया।
पुराना हिसाब बही का काम है। आज से आगे का हिसाब फ़ोन का।
बही अभी फेंकिए मत
कुछ महीने बही संभालकर रखिए। इसकी वजह भावुक नहीं, व्यावहारिक है — कभी कोई ग्राहक पुराने किसी लेन-देन की बात करेगा, और तब बही ही जवाब देगी।
और एक बात, जो शायद सबसे ज़्यादा भरोसा देती है: पहले कुछ हफ़्ते दोनों साथ चलाइए। जो बिल फ़ोन में बना, उसकी एक लाइन बही में भी लिख दीजिए। यह दोहरा काम है, पर सिर्फ़ दो-तीन हफ़्ते का — और उसके बाद आप ख़ुद बही लिखना बंद कर देंगे, क्योंकि उसकी ज़रूरत महसूस होनी बंद हो जाएगी।