बारकोड को लेकर सबसे आम धारणा यह है कि यह बड़ी दुकानों की चीज़ है — कि इसके लिए काउंटर, तार और एक लाल रोशनी वाली मशीन चाहिए। यह अब सही नहीं है। जो कैमरा आपके फ़ोन में है, वह पैकेट पर छपी लकीरें उतनी ही अच्छी तरह पढ़ता है।
और जिस चीज़ के लिए यह सबसे ज़्यादा काम आता है, वह रफ़्तार नहीं है। रफ़्तार का फ़र्क़ एक-दो सेकंड का होता है। असली फ़र्क़ यह है कि कोड से आया सामान हमेशा वही सामान होता है, उसी दाम के साथ — और नाम टाइप करने में होने वाली ग़लतियाँ, जो स्टॉक को महीनों तक ग़लत रखती हैं, ख़त्म हो जाती हैं।
शुरू कैसे करें
पूरे स्टॉक के कोड एक दिन में जमा करने की कोशिश मत कीजिए। यही वह क़दम है जिस पर लोग रुक जाते हैं, और फिर सब कुछ रुक जाता है।
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बीस सबसे ज़्यादा बिकने वाले सामान से शुरू कीजिए
हर दुकान में बीस-पच्चीस चीज़ें ऐसी होती हैं जो आधे से ज़्यादा बिल में आती हैं। उन्हीं के कोड पहले जोड़िए। बाक़ी सैकड़ों चीज़ें बाद में, धीरे-धीरे।
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सामान जोड़ते वक़्त कोड स्कैन कीजिए
नया सामान दर्ज करते समय कैमरे से उसका कोड पढ़वा दीजिए। यह एक बार का काम है — उसके बाद वह कोड हमेशा उसी सामान से जुड़ा रहेगा।
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बिल बनाते वक़्त स्कैन कीजिए
बिल बनाते समय कैमरा खोलिए और पैकेट सामने कर दीजिए। सामान अपने दाम के साथ बिल में जुड़ जाएगा। जिन चीज़ों का कोड अभी नहीं जोड़ा, उन्हें नाम से जोड़िए — एक ही बिल में दोनों तरीक़े चलते हैं।
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जो छूट गया, उसे बिकते वक़्त जोड़िए
जिस दिन कोई ऐसा सामान बिके जिसका कोड दर्ज नहीं है, उसी वक़्त दस सेकंड लगाकर जोड़ दीजिए। दो हफ़्ते में आपकी दुकान का जो हिस्सा सचमुच बिकता है, उसके कोड जमा हो जाएँगे।
किन चीज़ों पर यह काम नहीं करेगा
यह साफ़ जान लेना ज़रूरी है, वरना उम्मीद ग़लत बनती है और फिर पूरा तरीक़ा छोड़ दिया जाता है।
| सामान की तरह | कोड से आएगा? | क्या कीजिए |
|---|---|---|
| पैक किया हुआ ब्रांडेड सामान | हाँ | एक बार कोड जोड़िए, फिर स्कैन |
| खुला अनाज, दाल, चावल | नहीं | तौल कर दाम से जोड़िए |
| सब्ज़ी और फल | नहीं | तौल कर दाम से जोड़िए |
| दुकान पर बना सामान | नहीं | अपना नाम और दाम रखिए |
| एक ही चीज़ के अलग पैक | हाँ, अलग-अलग | हर पैक अलग सामान की तरह दर्ज कीजिए |
इस सूची से यह भी साफ़ हो जाता है कि किराना दुकान में बारकोड कभी सौ फ़ीसदी नहीं होगा, और यह कोई कमी नहीं है। आधा सामान कोड से और आधा नाम से — यही असली दुकान की शक्ल है।
जब कैमरा कोड न पढ़े
यह होता है, और लगभग हमेशा तीन में से एक वजह से होता है।
- रोशनी कम है। कैमरा कोड की पतली और मोटी लकीरों का फ़र्क़ नहीं पकड़ पाता। काउंटर पर एक सीधी रोशनी इसका पूरा हल है।
- फ़ोन बहुत पास है। पूरा कोड, दोनों किनारों समेत, फ़्रेम में आना चाहिए। थोड़ा पीछे कीजिए।
- पैकेट मुड़ा हुआ है। सिलवट पर लकीरें टूट जाती हैं। पैकेट को थोड़ा सीधा कर लीजिए।
और अगर फिर भी न बने, तो कोड के नीचे छपे अंक टाइप कर दीजिए। वह वही नंबर है जो लकीरें कहती हैं — नतीजा बिलकुल वही रहेगा।
स्कैनर वह मशीन नहीं है जो आपको ख़रीदनी है। वह वही फ़ोन है जिससे आप बिल बना रहे हैं।
दो हफ़्ते बाद क्या बदलेगा
दो चीज़ें। पहली, बिल बनाने में लगने वाला वक़्त थोड़ा घटेगा — पर इतना नहीं कि यही वजह काफ़ी हो। दूसरी, और असली — आपके स्टॉक के नंबर सही होने लगेंगे, क्योंकि हर बिक्री उसी सामान से घटेगी जो सचमुच गया है।
स्टॉक मिलान की जो शिकायत ज़्यादातर दुकानों की होती है, उसकी आधी वजह बिल में ग़लत सामान चढ़ना है। कोड यही आधी वजह हटा देता है।