तारीख़ें भूलने की वजह याददाश्त नहीं होती। दुकानदार को महीने की बीसियों चीज़ें याद रहती हैं — किसका उधार बाक़ी है, कौन सा माल आने वाला है, किस ग्राहक को क्या चाहिए। जो चीज़ें छूटती हैं वे वही होती हैं जो महीने में एक बार आती हैं और जिनकी कोई याद दिलाने वाली व्यवस्था नहीं होती।
पहला काम: पता कीजिए कि क्या लागू है
यह साल में एक बार का काम है और इसे टालने की कोई वजह नहीं। अपने अकाउंटेंट से एक बार पूछ लीजिए कि आपके कारोबार पर कौन-कौन सी चीज़ें लागू हैं और उनकी तारीख़ें क्या हैं। इसे काग़ज़ पर लिखवा लीजिए।
ज़्यादातर दुकानदारों को यह अंदाज़ा तो होता है कि कुछ भरना है, पर सूची कभी लिखी हुई नहीं होती। बिना लिखी सूची हर महीने नए सिरे से याद करनी पड़ती है, और किसी न किसी महीने वह याद नहीं आती।
दूसरा काम: दो निशान लगाइए
हर तारीख़ के लिए कैलेंडर में दो निशान चाहिए — एक ख़ुद तारीख़ पर, और एक उससे कुछ दिन पहले। दूसरा निशान असल में ज़्यादा ज़रूरी है, क्योंकि तारीख़ वाले दिन तैयारी करना पहले ही देर हो चुकी होती है।
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तारीख़ फ़ोन के कैलेंडर में डालिए, हर महीने के लिए
एक बार डालकर उसे हर महीने दोहराने पर लगा दीजिए। काग़ज़ पर लिखी तारीख़ उसी दिन दिखती है जिस दिन काग़ज़ देखा जाए।
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उससे तीन-चार दिन पहले का एक और निशान लगाइए
यह तैयारी का दिन है — आँकड़े देखने, पर्चियाँ मिलाने और अकाउंटेंट को भेजने का। तारीख़ वाला दिन सिर्फ़ भेजने का होना चाहिए।
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अकाउंटेंट को क्या चाहिए, वह एक बार लिख लीजिए
हर महीने वही चीज़ें चाहिए होती हैं। सूची एक बार बन जाए तो तैयारी का दिन आधे घंटे का रह जाता है।
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भेजने के बाद निशान लगाइए
क्या भेजा और कब — यह लिख लीजिए। छह महीने बाद यही रिकॉर्ड बताता है कि कौन सा महीना छूटा था।
असली काम महीने भर होता है
तारीख़ छूटने का सबसे बड़ा कारण यह नहीं होता कि दिन याद नहीं रहा। कारण यह होता है कि दिन याद आया और आँकड़े तैयार नहीं थे — इसलिए काम टल गया, और फिर छूट गया।
- हर बिक्री उसी दिन दर्ज हो। महीने के आख़िर में तीस दिन के बिल याद से बनाना न सिर्फ़ मुश्किल है, ग़लत भी होता है।
- हर ख़र्च उसी दिन दर्ज हो, चाहे छोटा हो।
- ख़रीद की सारी पर्चियाँ एक ही जगह रहें — एक डिब्बा, एक फ़ाइल, या फ़ोन में एक फ़ोल्डर।
- महीने के आख़िर में एक बार रिपोर्ट देख लीजिए, तारीख़ से पहले, ताकि कोई बड़ी चूक वहीं दिख जाए।
खाता ऐप में बिक्री, ख़र्च और ख़रीद की रिपोर्टें तारीख़ की सीमा चुनकर निकाली जा सकती हैं, इसलिए महीने का ब्यौरा निकालना अलग काम नहीं रह जाता। पर यह उतना ही अच्छा होगा जितना दिन भर दर्ज किया गया हो — कोई रिपोर्ट उस बिक्री को नहीं दिखा सकती जो कभी लिखी ही नहीं गई।
तारीख़ वाले दिन का काम भेजना होना चाहिए, बनाना नहीं।
अगर कुछ छूट जाए
छूटी हुई तारीख़ को टालना उसे और महँगा बनाता है। जिस दिन पता चले उसी दिन अकाउंटेंट से बात कीजिए और सबसे पुरानी छूटी चीज़ से शुरू कीजिए, क्योंकि अक्सर आगे की चीज़ें उसी पर अटकी होती हैं।
और उसके बाद वही करिए जो इस लेख का पूरा मक़सद है — उस तारीख़ को कैलेंडर में डाल दीजिए, दो निशानों के साथ, ताकि अगली बार यह याद रखने की चीज़ न रहे।