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स्टॉक और पैसा

सप्लायर का हिसाब: ऑर्डर, आया कितना, और देना कितना

एक ही ख़रीद के तीन हिस्से होते हैं और दुकानें अक्सर सिर्फ़ पहला लिखती हैं। बाक़ी दो ही वे हैं जिन पर बाद में झगड़ा होता है।

7 मिनट का पाठ

सप्लायर का हिसाब तीन हिस्सों मेंएक ही ख़रीद के तीन हिस्से — क्या ऑर्डर हुआ, कितना आया, और कितना देना बाक़ी है।एक ख़रीद, तीन अलग बातें५० बोरीऑर्डर किया४६ बोरीआया कितना₹१२,४००बाक़ी देनाचार बोरी का फ़र्क़ उसी दिन दिखता है, महीने बाद नहीं

संक्षेप में

  • हर ख़रीद के तीन हिस्से हैं — क्या ऑर्डर किया, कितना आया, और कितना देना बाक़ी है। तीनों अलग-अलग लिखे जाने चाहिए।
  • माल उतरते वक़्त ही गिनिए। गाड़ी जाने के बाद "चार बोरी कम थीं" कहना बहस है, रिकॉर्ड नहीं।
  • सप्लायर की पर्ची अपने आप हिसाब नहीं बनती। जो आपने गिना वह लिखिए, जो उसने लिखा वह नहीं।
  • हर सप्लायर का अलग बकाया देखिए। कुल "देना है" एक नंबर है जो किसी काम नहीं आता।

ख़रीद का हिसाब ज़्यादातर दुकानों में एक ही लाइन का होता है — "आज फ़लाँ से इतने का माल आया"। यह लाइन सही है, पर अधूरी है, और उसकी क़ीमत उस दिन चुकानी पड़ती है जिस दिन कुछ कम निकले या कोई पुरानी रकम याद न आए।

एक ख़रीद असल में तीन अलग बातें हैं: क्या माँगा गया, क्या पहुँचा, और कितना पैसा देना बाक़ी है। ये तीनों एक-दूसरे से नहीं निकाली जा सकतीं, इसलिए तीनों अलग-अलग दर्ज होनी चाहिए।

तीसरा ख़ाना पहले दो से नहीं निकलता। वह अलग हिसाब है।एक ही ख़रीद के तीन ख़ाने — ऑर्डर किया गया माल, आया हुआ माल, और बाक़ी देना।एक ख़रीद, तीन अलग बातें५० बोरीऑर्डर किया४६ बोरीआया कितना₹१२,४००बाक़ी देनाचार बोरी का फ़र्क़ उसी दिन दिखता है, महीने बाद नहीं
तीसरा ख़ाना पहले दो से नहीं निकलता। वह अलग हिसाब है।

पहला हिस्सा — क्या माँगा गया

यह वही हिस्सा है जो सबसे ज़्यादा छूटता है, क्योंकि यह सबसे कम ज़रूरी लगता है। ऑर्डर फ़ोन पर दिया जाता है, याद रखा जाता है, और माल आने पर उसकी ज़रूरत ख़त्म मान ली जाती है।

पर जिस दिन पचास में से छियालीस बोरी आएँगी, आपको वह चार बोरी सिर्फ़ तभी दिखेंगी जब पचास कहीं लिखा हो। नहीं लिखा हो तो छियालीस ही पूरा ऑर्डर लगेगा, और अगले महीने का हिसाब उसी छियालीस पर बनेगा।

दूसरा हिस्सा — कितना आया

गिनती माल उतरते वक़्त ही होनी चाहिए, गाड़ी के सामने। यह असुविधाजनक है, इसमें दस मिनट लगते हैं, और सप्लायर का आदमी जल्दी में होता है। फिर भी यही इकलौता वक़्त है जब कमी सुधर सकती है।

  • बोरी या पेटी गिनिए, वज़न बाद में देखिए। संख्या पर बहस कम होती है।
  • टूटा या ख़राब माल उसी वक़्त अलग रखिए और उसे भी दर्ज कीजिए।
  • जो कम है उसे सप्लायर के आदमी को दिखाकर बताइए, गाड़ी जाने से पहले।
  • अपनी गिनती लिखिए — उसकी पर्ची से नक़ल मत कीजिए। दोनों अलग चीज़ें हैं।

तीसरा हिस्सा — कितना देना बाक़ी है

यह हिस्सा उधार वसूली का उलटा है, और अजीब बात यह है कि जो दुकानदार अपने ग्राहकों का बकाया रोज़ देखता है, वह अक्सर अपने सप्लायर का बकाया याद पर छोड़ देता है।

क्या देखना हैक्योंकितनी बार
हर सप्लायर का अलग बकायाकुल रकम किसी काम की नहीं होतीहर हफ़्ते
कौन सी रकम सबसे पुरानी हैपुराना बकाया रिश्ते पर असर डालता हैहर हफ़्ते
इस महीने कितना देना हैपैसे का इंतज़ाम पहले से होमहीने की शुरुआत में
कहीं दो बार तो नहीं दियाजल्दी में यह होता हैमहीने के आख़िर में

आख़िरी लाइन को हल्के में मत लीजिए। जिन दुकानों में भुगतान कभी नक़द, कभी फ़ोन से और कभी किसी और के हाथ जाता है, वहाँ एक ही रकम दो बार जाना असामान्य नहीं है — और सप्लायर हमेशा बताता भी नहीं।

जब हिसाब मिलता न हो

सप्लायर के साथ हिसाब का झगड़ा लगभग हमेशा एक ही वजह से होता है: दोनों तरफ़ अलग-अलग रिकॉर्ड हैं और दोनों अपने-अपने रिकॉर्ड से सही हैं। इसका हल बहस नहीं, तारीख़वार मिलान है।

एक काग़ज़ पर अपनी तरफ़ की सारी ख़रीद और सारा भुगतान तारीख़ के हिसाब से लिखिए, और उससे उनका हिसाब मिलाइए। नौ में से आठ बार फ़र्क़ किसी एक एंट्री का निकलता है — एक भुगतान जो उनके यहाँ नहीं चढ़ा, या एक माल जो आपके यहाँ नहीं चढ़ा।

सप्लायर से हिसाब तारीख़ पर मिलता है, याद पर नहीं।

एक छोटी शुरुआत

अगले माल की गाड़ी आने पर सिर्फ़ इतना कीजिए: ऑर्डर देते वक़्त वह लिख लीजिए, माल उतरते वक़्त गिनकर लिखिए, और भुगतान करते वक़्त उसे दर्ज कीजिए। तीन जगह, तीन लाइनें।

तीन महीने बाद आपके पास हर सप्लायर का एक साफ़ रिकॉर्ड होगा — कौन पूरा माल भेजता है, कौन हमेशा कम भेजता है, और किससे हिसाब में सबसे ज़्यादा वक़्त लगता है। यह जानकारी दाम से कम क़ीमती नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ऑर्डर अलग से लिखने की क्या ज़रूरत है, माल तो आ ही जाता है?

ज़रूरत तब पड़ती है जब माल पूरा न आए, और यह अक्सर होता है। अगर सिर्फ़ आया हुआ माल लिखा गया है, तो यह जानने का कोई तरीक़ा नहीं बचता कि क्या कम आया — क्योंकि जो नहीं आया वह कहीं दर्ज ही नहीं है। ऑर्डर लिखा हो तो कमी अपने आप दिखती है, याद करने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

माल गिनने का सही वक़्त कौन सा है?

जब गाड़ी खड़ी हो और उतारने वाला सामने हो। यह असुविधाजनक लगता है और इसमें दस मिनट लगते हैं, पर यही इकलौता वक़्त है जब कमी सुधर सकती है। एक बार गाड़ी निकल गई तो कमी की बात आपके शब्द और उसके शब्द के बीच रह जाती है, और उस बहस में आम तौर पर दुकानदार हारता है।

सप्लायर का बिल और मेरा हिसाब अलग हो तो किसे सही मानूँ?

जो आपने गिना उसे। सप्लायर की पर्ची यह बताती है कि उसने क्या भेजा, आपकी गिनती यह बताती है कि क्या पहुँचा — और इन दोनों में फ़र्क़ हो सकता है। दोनों को अलग-अलग दर्ज कीजिए और फ़र्क़ उसी दिन सप्लायर को बता दीजिए। जो फ़र्क़ उसी दिन बताया जाए वह सुधार है; जो महीने बाद बताया जाए वह इल्ज़ाम बन जाता है।

छोटी दुकान के लिए ख़रीद ऑर्डर बनाना ज़्यादा नहीं है?

पूरा काग़ज़ी ऑर्डर हर ख़रीद के लिए ज़रूरी नहीं। ज़रूरी यह है कि जो माँगा गया वह कहीं दर्ज हो — फ़ोन पर बोला गया ऑर्डर भी लिख लेना काफ़ी है। खाता ऐप में ख़रीद ऑर्डर बनाया जा सकता है और माल आने पर उसी के सामने मात्रा दर्ज होती है, जिससे कमी अपने आप दिखती है। जिन दुकानों में एक ही सप्लायर रोज़ आता है, वहाँ भी महीने में एक बार यह हिसाब मिलाना काम आता है।

खाता ऐप मुफ़्त है

बिलिंग, उधार खाता, स्टॉक और रिपोर्ट — सब आपके फ़ोन पर। कोई कार्ड नहीं, कुछ रद्द करने की ज़रूरत नहीं।

देखें आपको क्या मिलता है

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